मिट्टी हूँ मै अभी 
पत्थर बनूँ  कैसे ?
बिखर ना जाऊं 
ज़र्रे-ज़र्रे में कहीं 
इस ज़र्रे को 
पत्थर बनाऊं कैसे ? 


ख़ामोश है वो 

क्योंकि भगवान है वो 
किसी शिल्पकार के हाथो 
तराशा पत्थर है वो