तेरा शहर !
कुछ तो चाँद पहले से ही अँधेरे में निकला था कुछ चाँदनी ने घूँगट ओढ़ लिया कुछ तो पैर फैलाने के लिए पहले ही जगह कम थी, तेरे शहर में कुछ मयख़ाने…
कुछ तो चाँद पहले से ही अँधेरे में निकला था कुछ चाँदनी ने घूँगट ओढ़ लिया कुछ तो पैर फैलाने के लिए पहले ही जगह कम थी, तेरे शहर में कुछ मयख़ाने…
तुम बिन सावन सूना सूना मेरे मन का कोना है कोयल बोले , मनवा डोले विरहा आग जलाती है तुम रूठे, सपने टूटे सावन भी कांटे चुभाता है हरे -हरे…
हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है…
अँधेरे रास्तो से गुजरी जो एक परछायी दरवाजे बंद हो गए सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी खौफ था आँखों में …
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा एक खण्डर की पहचान दे गया
बचपन , खुशियों से भरा कुछ रोना , कुछ हँसना कुछ खाना , कुछ खेलना दिन में सोना, रात में सोना माँ की ममता उसका फटकारना लोरी सुनाना …
जीवन के इस पथ पर बढ़ा जा रहा हूँ मौसम बदल रहे हैं कभी वर्षा , कभी तूफान तो कभी पतझड़ आ रहे हैं सब वो ही है वो ही…
सौंदर्य, सौंदर्य से ही विलासिता जीवन का एकाकीपन और वैराग्यता सौन्दर्यता प्रकर्ति की स्त्री की सौन्दर्यता रेगिस्तान में तपती रेत की पतझड़ में सूखे पत्तो की काले बादलो में दौड़ती बिजली की सौन्दर्यता…
बाधा हो पग- पग पर ह्रदय में हो आशा चेतन हो कितना भी आहत विश्राम नहीं पथ पर उज्जवल हो अभिलाषा थक कर चूर हुए कभी श्रम पथ पर तो…
पग - पग हो बाधा पर लक्ष्य देखना आगे बढ़ जाना गीता सार यहीं प्रत्यक्ष समाना आहत हो तो फिर चल जाना एकरूप देखना आत्मविश्वास जगाना ह्रदय में मात्र एक भाव प्रेम रख …