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यूँ तो अक्सर सफर में छोटे बड़े प्लेटफार्म निकलते जाते हैं लेकिन रुक जाती हैं आँखे ये नज़र क्षण भर के लिए टाट -पट्टियों से लिपटे समाज पर शरीर के…
यूँ तो अक्सर सफर में छोटे बड़े प्लेटफार्म निकलते जाते हैं लेकिन रुक जाती हैं आँखे ये नज़र क्षण भर के लिए टाट -पट्टियों से लिपटे समाज पर शरीर के…
कुछ तो चाँद पहले से ही अँधेरे में निकला था कुछ चाँदनी ने घूँगट ओढ़ लिया कुछ तो पैर फैलाने के लिए पहले ही जगह कम थी, तेरे शहर में कुछ मयख़ाने…
तुम बिन सावन सूना सूना मेरे मन का कोना है कोयल बोले , मनवा डोले विरहा आग जलाती है तुम रूठे, सपने टूटे सावन भी कांटे चुभाता है हरे -हरे…
हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है…