दहशत
अँधेरे रास्तो से गुजरी जो एक परछायी दरवाजे बंद हो गए सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी खौफ था आँखों में …
अँधेरे रास्तो से गुजरी जो एक परछायी दरवाजे बंद हो गए सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी खौफ था आँखों में …
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा एक खण्डर की पहचान दे गया
बचपन , खुशियों से भरा कुछ रोना , कुछ हँसना कुछ खाना , कुछ खेलना दिन में सोना, रात में सोना माँ की ममता उसका फटकारना लोरी सुनाना …
जीवन के इस पथ पर बढ़ा जा रहा हूँ मौसम बदल रहे हैं कभी वर्षा , कभी तूफान तो कभी पतझड़ आ रहे हैं सब वो ही है वो ही…