गाय का निबन्ध
याद आता है की कक्षा ५ तक हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो…
याद आता है की कक्षा ५ तक हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो…
ना जाने कब इस सुबह की रात हो जाय मिलते रहा करो यूँ ही ,जाने कब समय की चाल रूक जाये
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो सोचता हूँ कि दिन में सपने देखना बुरा नहीं था । ये अलग बात रही की उन सपनो को पूरा करने के लिए…
बड़े ही असमंजस और दुःख के साथ कम्प्यूटर विशेषज्ञ की दुकान से वापिस लौटा, निराशा की किरण ने दस्तक तो दी लेकिन स्वयं की आशावादी प्रकर्ति ने उसको अंदर आने…