मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो
मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो पूछ ही लेंगे अबकी बार मेरी कब्र पे जब चिराग जलायेगा वो बड़े अरमानो से दिल में सजाया था उसको क्यों दर्द…
मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो पूछ ही लेंगे अबकी बार मेरी कब्र पे जब चिराग जलायेगा वो बड़े अरमानो से दिल में सजाया था उसको क्यों दर्द…
Ref:pixabay आधार प्रेम का विशवास का कम ही होगा वरना कभी ऐसा तो नहीं था कि हमारे -तुम्हारे बीच के फासले आज यूँ ही बढ़ गए विरुद्ध हो गया…
तूफ़ान उठता है मेरे सीने में भी मगर तेरे शहर की हवाओ से अलग है वो रौशनी होती है मेरे दिल के कोने में भी मगर तेरे शहर के उजाले…
कुछ तो शराफत तेरे शहर में पहले से ही कम थी। कुछ हम तेरी गली से निकल गये। कुछ शराफ़त तेरे लिबास में पहले से ही कम थी कुछ हमे…