दर्द पलकों पे
झुका के गर्दन जो हम निकले गली से वो समझे बेसहारा, मायूस हो गए उनको खबर क्या हम दर्द पलकों पे उनका कितना उठा ले गए तरसते थे पहचान को…
झुका के गर्दन जो हम निकले गली से वो समझे बेसहारा, मायूस हो गए उनको खबर क्या हम दर्द पलकों पे उनका कितना उठा ले गए तरसते थे पहचान को…
जिंदगी ने कल हमसे सवाल कर ही लिया कितने मुखोटे हैं तुम्हारे पास ? क्यों अपना अस्तितत्व खो दिया ? हर इंसान से दिखावा हर इंसान से अलग व्यवहार फिर…
तुम उड़ो खुले जहान में चाहे जहाँ जी भर के आके बैठना मगर मेरे घर कि छत पे दीदारे अक्ष तेरा करता रहूँगा मेरी जिंदगी की शाम ना हो जाये जब…
जीवन पथ है खुशियों से भरा इस पथ पर तुम चलते जाना फूलो सी मुस्कान मिलेगी नदियों सी चंचलता मिलेगी आ जाये बादल काले कभी तो शबनम सी बूंदे भी…