पहचान
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा मेरे जीवन को भी एक खण्डर की पहचान दे गया
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा मेरे जीवन को भी एक खण्डर की पहचान दे गया
जिंदगी ने हमसे कुछ यूँ फांसला बना लिया चेहरे पे हँसी दे दी और आँखों से उजाला छीन लिया रोने को चाहे तो रो दे मगर आँसुओ ने भी ना…
सींचता हूँ मै, कुछ फूलो के पैड कुछ फूलो के पैड, लिए, इस उम्मीद में, कि फूल खिलेंगे मेरे आँगन में। होगा ना भेद-भाव किसी में , रंग-रूप अलग…
होठ उठे जब लहरो कि तरहा बाल लहराये घटाओ की तरहा दिल के कोने से आवाज आयी तार बज उठा और मन के रंगो से तस्वीर सजायी झुकी पलके जब …