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याद आता है की कक्षा ५ तक हिंदी
और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते
थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो आता ही था उससे पहले अध्यापक गण
उसका निरंतर अभ्यास भी कराया करते थे और गृह कार्य में ये सम्मिलित रहता
था। जब घर जाते तो सभी को बताते की आज ” गाय का निबन्ध ” लिखना है, बहुत
बड़ा कार्य अहसास होता । बड़े लोगो से पूछते कृप्या लिखवा दीजिये ” गाय का निबन्ध “।
बड़े भाई- बहन और पड़ोस के लोग भी अपने को और बड़ा समझने की अनुभूति करते।
माँ से हालात देखे नहीं जाते तो गाय के पास ले जाकर बताती की लिख दे जो
तुझको दीखता है। उसका रंग, पैर, थन, पूँछ और दूध। फिर दूध का उपयोग, किस
तरह किया जाता है ? माँ बोलती की दूध को पहले हारे में रखना पड़ता है और शाम
तक उसको हलकी आंच पर उबालते है, फिर उसमे खट्टा लस्सी डालकर दही बनने के
लिए रात में रख देते है और सुबह को बड़ी सी रई और बड़ी हांडी में बिलाकर
उससे मक्खन निकालते हैं जिसको लस्सी के साथ खाने पर बड़ा ही स्वादिष्ट लगता
है , और गरम करने पर उससे घी निकलता है जिसको शक्कर के साथ मिलाकर चावलों
के साथ खाया जाता है ।
और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते
थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो आता ही था उससे पहले अध्यापक गण
उसका निरंतर अभ्यास भी कराया करते थे और गृह कार्य में ये सम्मिलित रहता
था। जब घर जाते तो सभी को बताते की आज ” गाय का निबन्ध ” लिखना है, बहुत
बड़ा कार्य अहसास होता । बड़े लोगो से पूछते कृप्या लिखवा दीजिये ” गाय का निबन्ध “।
बड़े भाई- बहन और पड़ोस के लोग भी अपने को और बड़ा समझने की अनुभूति करते।
माँ से हालात देखे नहीं जाते तो गाय के पास ले जाकर बताती की लिख दे जो
तुझको दीखता है। उसका रंग, पैर, थन, पूँछ और दूध। फिर दूध का उपयोग, किस
तरह किया जाता है ? माँ बोलती की दूध को पहले हारे में रखना पड़ता है और शाम
तक उसको हलकी आंच पर उबालते है, फिर उसमे खट्टा लस्सी डालकर दही बनने के
लिए रात में रख देते है और सुबह को बड़ी सी रई और बड़ी हांडी में बिलाकर
उससे मक्खन निकालते हैं जिसको लस्सी के साथ खाने पर बड़ा ही स्वादिष्ट लगता
है , और गरम करने पर उससे घी निकलता है जिसको शक्कर के साथ मिलाकर चावलों
के साथ खाया जाता है ।

फिर बात यहाँ कब ख़त्म होनी थी अनपढ़ माँ को भी तो यही अपने पढ़े होने और ज्ञान को बाँटने का अवसर मिला था तो उसने उपलों (गोस्से ) की भी बात बतानी जरुरी समझी। बताया की इसके गोबर से उपले बनते है जो ईंधन का काम करते हैं और इसके धुएँ से कुछ नुक्सान भी नहीं होता और मच्छर भी भाग जाते इसलिए गर्मियों में सोने से पहले उपलों का धुआँ करते हैं । और राख का प्रयोग घर के पास बनी छोटी क्यारियों में खाद का काम भी करती है। अतिरिक़्त गोबर को इक्खट्टा करके उसको खाद के रूप में खेतो में प्रयोग किया जाता है ।
और फिर तो माँ को जैसे सारी उपयोगिता ही पता ही थी कहने लगी दूध से मावा निकालकर मिठाइयां भी तो बनाई जाती है। रस्गुले और खीर और बहुत सारी चीजे । और छोटे बच्चो को गाय का दूध ही पिलाते है । किसी भी देसी दवाई में केवल गाय का दूध ही मिलाया जाता है ।
गाय इतनी उपयोगी है मानवता के लिए अभी तक ये सोचा भी नहीं था आज देखकर सुनकर बहुत अच्छा लगा।
बाकी है…
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