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अँधेरे रास्तो से
गुजरी जो एक परछायी
दरवाजे बंद हो गए
सहमा-सहमा सा आसमान
सहमी -सहमी सी रात हो गयी
खौफ था आँखों में
घाव भी हरा था
ये फिर किसने
पत्थर फ़ेंक दिया
ये फिर किस घर के
टुकड़े -टुकड़े हो गए
तुम भी बिठालो
आँखों में रात को
एक दहशत की तरहा
या उठालो पत्थर
बेरहमो की तरहा
ये ख्याल मगर रखना
ये शहर अमन चैन का था
यहाँ लोगो ने रिश्ते
मजहब से नहीं
इन्सानी उम्रे अंदाज से बनाये थे
खेलो ना जात -धर्म से तुम
यहाँ हर इंसान के
खून का कतरा
अभी सुर्ख़ लाल है
यहाँ हर इंसान के
खून का कतरा
अभी सुर्ख़ लाल है

