मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो
पूछ ही लेंगे अबकी बार मेरी कब्र पे जब चिराग जलायेगा वो
बड़े अरमानो से दिल में सजाया था उसको
क्यों दर्द बनके आँखों से, आँसुओ में टपकता है वो
रह -रहकर याद आती है उसकी, दफ़न मेरे होने के बाद भी
अबके जब मिलेगा आँखों में कैद हो जायेगा वो Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
पूछ ही लेंगे अबकी बार मेरी कब्र पे जब चिराग जलायेगा वो
बड़े अरमानो से दिल में सजाया था उसको
क्यों दर्द बनके आँखों से, आँसुओ में टपकता है वो
रह -रहकर याद आती है उसकी, दफ़न मेरे होने के बाद भी
अबके जब मिलेगा आँखों में कैद हो जायेगा वो Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
खुदा करे कि आये ना तमाशबीनो को नज़र
काँधे पे लेके निकले शहर में जब मेरा जनाजा वो
(क)सुशील

