तुम उड़ो खुले जहान में
चाहे जहाँ जी भर के
आके बैठना मगर
मेरे घर कि छत पे
दीदारे अक्ष तेरा
करता रहूँगा
मेरी जिंदगी की शाम ना
हो जाये जब तक
चाहो तो एक नज़र देख लेना
मेरे इश्क़ की हैसियत क्या है ?
बता देना
और नाचीज़ की फितरत भी
है पाक मोहब्बतें सकून
ऐ कातिल !
इस इश्क़ में तू चाहे जितने इम्तिहान लेना
इस इश्क़ में तू चाहे जितने इम्तिहान लेना
चाहे जहाँ जी भर के
आके बैठना मगर
मेरे घर कि छत पे
दीदारे अक्ष तेरा
करता रहूँगा
मेरी जिंदगी की शाम ना
हो जाये जब तक
चाहो तो एक नज़र देख लेना
मेरे इश्क़ की हैसियत क्या है ?
बता देना
और नाचीज़ की फितरत भी
है पाक मोहब्बतें सकून
ऐ कातिल !
इस इश्क़ में तू चाहे जितने इम्तिहान लेना
इस इश्क़ में तू चाहे जितने इम्तिहान लेना
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