प्लेटफॉर्म

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यूँ तो अक्सर सफर में छोटे बड़े प्लेटफार्म निकलते जाते हैं लेकिन रुक जाती हैं आँखे ये नज़र क्षण भर के लिए टाट -पट्टियों से लिपटे समाज पर शरीर के…

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तेरा शहर !

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  • Post published:19/04/2015
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कुछ तो चाँद पहले से ही अँधेरे में निकला था  कुछ चाँदनी ने घूँगट ओढ़ लिया  कुछ तो पैर फैलाने के लिए पहले ही जगह कम थी, तेरे शहर में  कुछ मयख़ाने…

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