बचपन
बचपन , खुशियों से भरा कुछ रोना , कुछ हँसना कुछ खाना , कुछ खेलना दिन में सोना, रात में सोना माँ की ममता उसका फटकारना लोरी सुनाना …
बचपन , खुशियों से भरा कुछ रोना , कुछ हँसना कुछ खाना , कुछ खेलना दिन में सोना, रात में सोना माँ की ममता उसका फटकारना लोरी सुनाना …
जीवन के इस पथ पर बढ़ा जा रहा हूँ मौसम बदल रहे हैं कभी वर्षा , कभी तूफान तो कभी पतझड़ आ रहे हैं सब वो ही है वो ही…
सौंदर्य, सौंदर्य से ही विलासिता जीवन का एकाकीपन और वैराग्यता सौन्दर्यता प्रकर्ति की स्त्री की सौन्दर्यता रेगिस्तान में तपती रेत की पतझड़ में सूखे पत्तो की काले बादलो में दौड़ती बिजली की सौन्दर्यता…
बाधा हो पग- पग पर ह्रदय में हो आशा चेतन हो कितना भी आहत विश्राम नहीं पथ पर उज्जवल हो अभिलाषा थक कर चूर हुए कभी श्रम पथ पर तो…