पत्थर बनूँ कैसे ?
मिट्टी हूँ मै अभी पत्थर बनूँ कैसे ? बिखर ना जाऊं ज़र्रे-ज़र्रे में कहीं इस ज़र्रे को पत्थर बनाऊं कैसे ? ख़ामोश है वो क्योंकि भगवान है वो किसी शिल्पकार के हाथो तराशा…
मिट्टी हूँ मै अभी पत्थर बनूँ कैसे ? बिखर ना जाऊं ज़र्रे-ज़र्रे में कहीं इस ज़र्रे को पत्थर बनाऊं कैसे ? ख़ामोश है वो क्योंकि भगवान है वो किसी शिल्पकार के हाथो तराशा…
स्कूल का पी-ओन सी -ऑफ रोबोट सूरज सवेरे ८ बजे आकर खोल देता है दफ्तर व्यवश्थित कर अपनी पैन्ट्री पानी की बोतले, गिलास आदि अध्यापक कक्ष में रख देता है सजाकर।…
दामिनी वेदना झकजोर गयी हो आत्म मंथन के लिए छोड़ गई हो कब तक देखें मरते हुए, नारी को गाँवो से लेकर शहर की सड़को तक खेत से लेकर ,दफ्तर…