हे ! शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो

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शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो  प्रेम समीर तो बहने दो  देखो अब प्रियतम भी ऊब गए हैं  धुप को आँगन में मेरे आने तो दो  चिड़ियाँ भी देखो…

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परखने वाला नहीं मिला

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  • Post published:14/01/2015
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तुझसे मिलकर भी  मैं बिछुड़ने की भूल करता रहा हर शाम तन्हा तन्हा ख़ुद से बात करता रहा मै सीख तो गया गलतियों से मगर तुझसे बढ़कर भी मुझे कोई परखने वाला ना मिला  डॉ० सुशील…

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क्यों मुनासिब यूँ तेरा शहर लगा

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  • Post published:11/01/2015
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मेरी हसरते तेरे मुकाम की मोहताज नहीं  मै जीता हूँ की बस साँसो को  आने- जाने का ख्याल होता रहे   मुझे किसी के दिल की आवाज अक्सर  दस्तक तो देती है   क्यों यूँ मै हर…

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गुजरते लम्हे भी पूछने लगे है अब बीती हुई अँगड़ाईयो पे सवाल

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  • Post published:20/12/2014
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तेरे इश्क़ में बेख़बर  हूँ कि  कुछ दरवाज़े यूँ तलाश रहा हूँ  जो इस गली इस शहर में नहीं मगर  तेरी जुस्तजू में हर चीज़ जहाँ  मै दिल के आईने…

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