एतबार
जिंदगी ने कल हमसे सवाल कर ही लिया कितने मुखोटे हैं तुम्हारे पास ? क्यों अपना अस्तितत्व खो दिया ? हर इंसान से दिखावा हर इंसान से अलग व्यवहार फिर…
जिंदगी ने कल हमसे सवाल कर ही लिया कितने मुखोटे हैं तुम्हारे पास ? क्यों अपना अस्तितत्व खो दिया ? हर इंसान से दिखावा हर इंसान से अलग व्यवहार फिर…
तुम उड़ो खुले जहान में चाहे जहाँ जी भर के आके बैठना मगर मेरे घर कि छत पे दीदारे अक्ष तेरा करता रहूँगा मेरी जिंदगी की शाम ना हो जाये जब…
जीवन पथ है खुशियों से भरा इस पथ पर तुम चलते जाना फूलो सी मुस्कान मिलेगी नदियों सी चंचलता मिलेगी आ जाये बादल काले कभी तो शबनम सी बूंदे भी…
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा मेरे जीवन को भी एक खण्डर की पहचान दे गया