गौरी का आँचल
ढका बादलो ने चाँद को ऐसे प्रियतम की राह देखती गौरी जैसे माथे पर बिंदिया ऐसे दमके चाँद ऊपर तारा जैसे चमके चांदनी रात में बादल ऐसे गहराए गौरी का…
ढका बादलो ने चाँद को ऐसे प्रियतम की राह देखती गौरी जैसे माथे पर बिंदिया ऐसे दमके चाँद ऊपर तारा जैसे चमके चांदनी रात में बादल ऐसे गहराए गौरी का…
मै धड़कता हूँ मुझे कोई दिल कहने की खता ना करे मै तड़पता हूँ चाँदनी रातो में मुझे कोई चकोर कहने की खता ना करे मै दबा हुआ हूँ अभी…
बाधा हो , हो पग-पग पर, ह्रदय में हो आशा, चेतन हो कितना भी आहत , विश्राम नहीं पथ पर , विश्राम नहीं पथ पर, हो एक उज्जवल अभिलाषा । …
पूछा है ये सवाल बार-बार मेरे मन ने मुझसे समुद्र सी गहराई उठती हुई लहरो की चंचलता है तुम्हारे पास ? सोन्दर्य, यौवन से पूर्ण , भव्य नदियो के मिलन …