दर्द भी अँधेरा भी

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अब तो आदत सी हो गयी है , तुम बिन जीने की।  रिश्तो के दर्द भी, अंधेरो में पीने की।  हर शाम गिरता हूँ , उठता हूँ , कभी तेरी…

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आदर्श कुर्सी के पीछे

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  • Post published:16/02/2014
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नेता कुर्सी पर जब सवार हो गया  तो , आदर्श कुर्सी के पीछे  टँग कर रह गया ।  कितना भ्रष्ट , असभ्य, धोखेबाज, ये नेता हो गया ।  घूस-खोरी, चापलूसी,…

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Love O God!

ऐ ख़ुदा !  टीस जख्मों की,  बर्दास्त करूँ तो मगर, दिल कि दीवारो पे,  तेरे नाम के सिवा, निशाँ कोई मंजूर नही ।  यूँ  अब दवा तो, जीने का एक…

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