दामिनी
दामिनी वेदना झकजोर गयी हो आत्म मंथन के लिए छोड़ गई हो कब तक देखें मरते हुए, नारी को गाँवो से लेकर शहर की सड़को तक खेत से लेकर ,दफ्तर…
Articles and poetry are part of this section. Sometimes shayri and shayrana andaaj reflect in a busy schedule. All are listed here without any rule of literature. Feelings at a different time and expression in poetic words.
दामिनी वेदना झकजोर गयी हो आत्म मंथन के लिए छोड़ गई हो कब तक देखें मरते हुए, नारी को गाँवो से लेकर शहर की सड़को तक खेत से लेकर ,दफ्तर…
हर एक सुबह एक गाँव , एक शहर सड़क पर निकल जाता है गाँव साइकिल पर काम की तलाश में और शहर पैदल मन को सकून देने वाली समीर की…
सुबह का समय सूरज, सवेरे सुबह ८ बजे आकर ही दफ्तर खोल देता है और सबसे पहले ताजा पानी भरने का काम करता है। अपनी पेन्ट्री को साफ़ व्यवस्थित करने…