यहाँ जख्मों को बाँटने का रिवाज़ चला है कुछ जख़्म हरे हो तो उन्हे बेच दिया करो
यहाँ जख्मों को बाँटने का रिवाज़ चला है कुछ जख़्म हरे हो तो उन्हे बेच दो ये बेमौसमी जख्मे सामान बिक जाएगा यूँ ही सोच- सोच कर वक़्त ज़ाया ना…
Articles and poetry are part of this section. Sometimes shayri and shayrana andaaj reflect in a busy schedule. All are listed here without any rule of literature. Feelings at a different time and expression in poetic words.
यहाँ जख्मों को बाँटने का रिवाज़ चला है कुछ जख़्म हरे हो तो उन्हे बेच दो ये बेमौसमी जख्मे सामान बिक जाएगा यूँ ही सोच- सोच कर वक़्त ज़ाया ना…
शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो प्रेम समीर तो बहने दो देखो अब प्रियतम भी ऊब गए हैं धुप को आँगन में मेरे आने तो दो चिड़ियाँ भी देखो…
तुझसे मिलकर भी मैं बिछुड़ने की भूल करता रहा हर शाम तन्हा तन्हा ख़ुद से बात करता रहा मै सीख तो गया गलतियों से मगर तुझसे बढ़कर भी मुझे कोई परखने वाला ना मिला डॉ० सुशील…
मेरी हसरते तेरे मुकाम की मोहताज नहीं मै जीता हूँ की बस साँसो को आने- जाने का ख्याल होता रहे मुझे किसी के दिल की आवाज अक्सर दस्तक तो देती है क्यों यूँ मै हर…