स्कूल का पी-ओन सी -ऑफ रोबोट सूरज
सवेरे ८ बजे आकर
खोल देता है दफ्तर
व्यवश्थित कर अपनी पैन्ट्री
पानी की बोतले, गिलास आदि
अध्यापक कक्ष में
रख देता है सजाकर।
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बैठ जाता है कभी
अपनी कुर्सी पर तो कभी
चहल कदमी दफ्तर में
बिरहा जैसे प्रेयसी ,
प्रियतम के दर्शन में।
पहली आदेशात्मक आवाज
“भैया ! कोसा पानी “
रक्त में ऊर्जा का अनन्त
जैसे हुआ हो संचार।
प्रेयसी का प्रियतम से ,
मिलन हुआ लगता पहली बार
आवाज, आवाज और एक आवाज
सब जुड़ जाती है
कोई एक चाय , हो कॉफी तो
कोई हॉट डॉग के साथ
जैसे जुड़ गया हो यहाँ
कोई बिखरा समाज
स्कूल का पी-ओन सी -ऑफ रोबोट सूरज
चाय पिलाता, खाना लाता
रखता ध्यान सभी का
लेकिन पूछा नहीं जाता
हो जन्मदिन की पार्टी
या कोई त्यौहार।
खड़ा हो जाता , तनहा, अंजाना सा
पैड किसी पतझड़ का जैसे
करता हो हरियाली का इंतज़ार

