भूख पेट से निकलकर बड़े घर की बेटी हो गयी
प्रगति की दौड़ में रिश्ते छोड़ दिए अपनों को अपना कहा नहीं स्वार्थ से रिश्ते जोड़ लिए होड़- दौड़, और दौड़ की इच्छा से मानव को नहीं स्वयंम को भी पीछे छोड़ गए चेहरे…
Social and scientific literature improves our understanding of different situations and helps for a smooth thinking process.
प्रगति की दौड़ में रिश्ते छोड़ दिए अपनों को अपना कहा नहीं स्वार्थ से रिश्ते जोड़ लिए होड़- दौड़, और दौड़ की इच्छा से मानव को नहीं स्वयंम को भी पीछे छोड़ गए चेहरे…
Feeling in hindi words: सुखा सिमटा सा उसका तन और मन मीलो दूर बैठा, जिससे बचपन, आँखों में, चमक लेकर होंठ बोले ……… अंकल , सेब ले लो …… रुका…
कुछ रिश्ते अधूरे थे शायद,वर्ना , कभी ऐसा तो नहीं था, हमारे-तुम्हारे बीच के फाँसले, यूँ ही बढ़ गए हो || विरुद्ध हो गया हूँ ,कई बार, स्वयं की विचार…
समर्पण करना चाहता हूँ , तुमको आँसू , वेदनाएँ असहाए पीड़ा , भूख ईर्ष्या-द्वेष और रिश्तो में छिपायी हुई नफरत, ठहाको के पीछे, खड़े , शोषण के विचार । मानसिक…
तुझसे मिलकर भी मैं बिछुड़ने की भूल करता रहा हर शाम तन्हा तन्हा ख़ुद से बात करता रहा मै सीख तो गया गलतियों से मगर तुझसे बढ़कर भी मुझे कोई परखने वाला ना मिला डॉ० सुशील…
जंगल उजाड़े पशु-पक्षी मारे अब धरोहर को मिटाना है । आधुनिकीकरण की राह में पर्यावरण उजड़ा अन्न उपजाऊ भूमि पर इमारतो का निर्माण सड़को के नाम पर लाखो-करोड़ों, पैड काटे…