भूख पेट से निकलकर बड़े घर की बेटी हो गयी

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  • Post published:18/04/2020
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प्रगति की दौड़ में रिश्ते छोड़ दिए अपनों को अपना कहा नहीं स्वार्थ से रिश्ते  जोड़ लिए होड़- दौड़, और दौड़ की इच्छा से मानव को नहीं स्वयंम को भी पीछे छोड़ गए चेहरे…

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तुझसे मिलूं कोनसा मुखोटा डालकर

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  • Post published:28/10/2014
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ज़रा सा आहत होते ही  स्वभाव बदल जाता है  वो कहता है की तू मेरा है  और आलम ये की हर चोट पर  वो बहुत दूर चला जाता है  …

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