ढका बादलो ने
चाँद को ऐसे
प्रियतम की राह
देखती गौरी जैसे
माथे पर बिंदिया
ऐसे दमके
चाँद ऊपर तारा
जैसे चमके
चांदनी रात में
बादल ऐसे गहराए
गौरी का आँचल
जैसे बार बार लहराये
बाद्ल बरसे
बरसे ऐसे
माला के मोती
हों जैसे बिखरे
हर बूंद लगती प्यारी
प्रियतम को हो
जैसे गौरी प्यारी Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
चाँद को ऐसे
प्रियतम की राह
देखती गौरी जैसे
माथे पर बिंदिया
ऐसे दमके
चाँद ऊपर तारा
जैसे चमके
चांदनी रात में
बादल ऐसे गहराए
गौरी का आँचल
जैसे बार बार लहराये
बाद्ल बरसे
बरसे ऐसे
माला के मोती
हों जैसे बिखरे
हर बूंद लगती प्यारी
प्रियतम को हो
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