क्या नहीं इस जीवन में
हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है…
हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है…
अँधेरे रास्तो से गुजरी जो एक परछायी दरवाजे बंद हो गए सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी खौफ था आँखों में …
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा एक खण्डर की पहचान दे गया
बचपन , खुशियों से भरा कुछ रोना , कुछ हँसना कुछ खाना , कुछ खेलना दिन में सोना, रात में सोना माँ की ममता उसका फटकारना लोरी सुनाना …