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सींचता हूँ मै, कुछ फूलो के पैड
कुछ फूलो के पैड,
लिए, इस उम्मीद में,
कि फूल खिलेंगे
मेरे आँगन में।
होगा ना भेद-भाव किसी में ,
रंग-रूप अलग हो चाहे जितने,
चलेगा पवन का झोका, जब भी,
मिल बाटेंगे खुशबू ,सब पैड,
मेरे इस आँगन में,
आयेगी तितलियाँ, रंग-बिरँगी
देखूँगा जिनको
जी भर कर मै ।
सींचता हूँ मै, कुछ फूलो के पैड
कुछ फूलो के पैड,
लिए, इस उम्मीद में,
कि फूल खिलेंगे
मेरे आँगन में।
@सुशील
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