विरहा
तुम बिन सावन सूना सूना मेरे मन का कोना है कोयल बोले , मनवा डोले विरहा आग जलाती है तुम रूठे, सपने टूटे सावन भी कांटे चुभाता है हरे -हरे…
तुम बिन सावन सूना सूना मेरे मन का कोना है कोयल बोले , मनवा डोले विरहा आग जलाती है तुम रूठे, सपने टूटे सावन भी कांटे चुभाता है हरे -हरे…
हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है…
अँधेरे रास्तो से गुजरी जो एक परछायी दरवाजे बंद हो गए सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी खौफ था आँखों में …
कौन ठहरा है वक़्त के सैलाब के आगे जब भी कोई दौर गुजरा एक खण्डर की पहचान दे गया