Articles and poetry are part of this section. Sometimes shayri and shayrana andaaj reflect in a busy schedule. All are listed here without any rule of literature. Feelings at a different time and expression in poetic words.

हे ! शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो

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  • Post published:15/01/2015
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शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो  प्रेम समीर तो बहने दो  देखो अब प्रियतम भी ऊब गए हैं  धुप को आँगन में मेरे आने तो दो  चिड़ियाँ भी देखो…

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परखने वाला नहीं मिला

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  • Post published:14/01/2015
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:26/02/2020
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तुझसे मिलकर भी  मैं बिछुड़ने की भूल करता रहा हर शाम तन्हा तन्हा ख़ुद से बात करता रहा मै सीख तो गया गलतियों से मगर तुझसे बढ़कर भी मुझे कोई परखने वाला ना मिला  डॉ० सुशील…

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क्यों मुनासिब यूँ तेरा शहर लगा

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  • Post published:11/01/2015
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:22/08/2019
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मेरी हसरते तेरे मुकाम की मोहताज नहीं  मै जीता हूँ की बस साँसो को  आने- जाने का ख्याल होता रहे   मुझे किसी के दिल की आवाज अक्सर  दस्तक तो देती है   क्यों यूँ मै हर…

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गुजरते लम्हे भी पूछने लगे है अब बीती हुई अँगड़ाईयो पे सवाल

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  • Post published:20/12/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:22/08/2019
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तेरे इश्क़ में बेख़बर  हूँ कि  कुछ दरवाज़े यूँ तलाश रहा हूँ  जो इस गली इस शहर में नहीं मगर  तेरी जुस्तजू में हर चीज़ जहाँ  मै दिल के आईने…

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ये सवाल इंसानियत के वज़ूद का है

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  • Post published:17/12/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:22/08/2019
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ये सवाल किसी कौम या मज़हब का नहीं ए वक़्त  ये सवाल इंसानियत के वज़ूद का है  इस फ़िज़ा में क्यों  औरते -बच्चे महफूज़ नहीं ? हैवानियत भी दर इस कदर …

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तुझसे मिलूं कोनसा मुखोटा डालकर

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  • Post published:28/10/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:18/04/2020
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ज़रा सा आहत होते ही  स्वभाव बदल जाता है  वो कहता है की तू मेरा है  और आलम ये की हर चोट पर  वो बहुत दूर चला जाता है  …

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श्री कृष्णा जन्माष्ठमी: एक व्रत सांसारिक कर्तव्य एवं धर्म निष्ठां के लिए

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  • Post published:17/08/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:22/08/2019
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(रिफरेन्स:yogeshvara.deviantart.com से साभार ) भारतीय परम्पराओ में कुछ खास अवसरों पर व्रत रहना एक सामाजिक और राष्ट्रिय प्रचलन रहा है । कुछ ऐसे ही अवसरों पर जब परिवार के सभी…

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गाय का निबन्ध

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  • Post published:17/07/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:22/08/2019
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याद आता है की कक्षा ५  तक  हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो…

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मेरी जीवन यात्रा के ३०० किमी

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  • Post published:13/07/2014
  • Post category:Poetry
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  • Post last modified:01/01/2022
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  आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो सोचता हूँ कि दिन में सपने देखना बुरा नहीं था । ये अलग बात रही की उन सपनो को पूरा करने के लिए…

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